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  • Hindi Poem- मेरे भटके हुए सिपाही
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Read Hindi Poem- मेरे भटके हुए सिपाही on Incidental Short Stories. This poem is written by Ms. Manju Bose who is a contributor in Incidental Short Stories. We have recently started this new section for people who love reading Hindi poems.

Hindi Poem- मेरे भटके हुए सिपाही

Hindi Poem- मेरे भटके हुए सिपाही

मेरी आवाज़ तुम तक पहुंचती ही नहीं ,

मेरी गीतों की शायद अब तुमको ज़रूरत भी नहीं !

बारूद के इन बिझील हवाओं के बीच,

यह मुमकिन नहीं के तुम्हे प्यार की महक याद रहे ।

तोपों की भयानक आवाज़ तले पायल की खनक आबाद रहे ।

 तुम खेल रहे हो मौत का खेल ,  मैं जीवन के गीत सुनाती हूँ ।

Hindi Poem- मेरे भटके हुए सिपाही

तुम सुनो या न सुनो,

 मेरे गीत तुम्हारी ही नज़र हैं ।

शायद कभी मेरे थके हुए सिपाही ,

 तुम्हे किसी कोयल की कुहुक तड़पI जाये । 

आधी नींद में किसी हवा के झोंके से,

 अचानक ही कुछ भुला हुआ याद आ जाये ।

 उस वक़्त राहों में बिखरी होगी मेरी आवाज़ कहीं ,

 मेरे गीतों के सहारे ,

 तुम घर वापस आ जाना । 

Written By- Ms. Manju Bose

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